भारत - प्रथम विश्व चिंतन

भारत के कुछ अत्यंत एहेम मुद्दे, जिसे अत्यंत ही 'इग्नोरेंस' के साथ भुला दिया गया अथवा बात ही नहीं की गयी.... हम india और हिंदुत्व के बारे सोच सोचकर अपना खून जलने वाले बेवकूफों में शामिल हैं..

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आधुनिकीकरण बनाम पश्चिमीकरण

Posted On: 29 Sep, 2012 Others में

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भारतीय युवा आधुनिकीकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे हैं. इस पीढ़ी में बहुत ही तीव्र गति से बदलाव आ रहा है.परन्तु चिंताजनक बात यह है की आज ‘पश्चिमीकरण’ ही आधुनिकीकरण का पैमाना बनता जा रहा है.जो युवा पश्चिमी संस्कृति में जितना ज्यादा घुलता मिलता है, वह उतना ही ज्यादा आधुनिक समझा जाता है.फिल्मों से शुरू हुई यह हवा अब आंधी का रूप ले चुकी है.घर में
परिवार के साथ टीवी देखना मुश्किल हो गया है. पति-पत्नी द्वारा एक दुसरे को धोखा देना,बिना विवाह किये युवा लड़के-लडकियों का विवाहित जोड़े की तरह रहना(लिव इन रिलाशंशिप) अब आम हो चले हैं.ऐसे युवा कम देखने को मिलते हैं, जो भारतीय संस्कृति बचाने के लिए प्रयासरत हों.हर देश की अपनी अलग संस्कृति होती है. भारतीय संस्कृति हमें एक अत्यंत मज़बूत वैवाहिक तथा पारिवारिक सम्बन्ध प्रदान करती
हैं.एक स्वच्छ ,सादगी भरा तथा ऊँची सोच वाला जीवन प्रदान करती हैं.वहीँ पश्चिमी संस्कृति एक अत्यंत ही कमज़ोर वैवाहिक तथा पारिवारिक सम्बन्ध प्रदान करती हैं. यूरोप और अमेरिका में टूटे-फूटे बर्बाद घर तथा एक अवसादग्रस्त बचपन देती हैं. एक दिखावटी जीवन देती है.भारतीय संस्कृति सर्वोत्तम है .  युवाओं को यह समझाने कि ज़रुरत है कि जहां आधुनिकीकरण भारत को विश्व शक्ति बना रहा है, वहीँ
दूसरी तरफ पश्चिमीकरण , भारत के आदर्शो को ध्वस्त कर रहा है, जिसके लिए भारत पूरी दुनिया में जाना जाता है. आधुनिकीकरण के लिए पश्चिमीकरण , कतई आवश्यक नहीं है.युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण पैदा करने के लिए किसी नए समाज सुधारक अभियान की आवश्यकता है,ताकि गुजरात की तर्ज़ पर पूरे देश में ‘ आधुनिकीकरण (बिना पश्चिमीकरण)’ का नारा बुलंद हो.भवदीय,



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pitamberthakwani के द्वारा
29/09/2012

आपकी सोच सही है इसलिए यह पोस्ट अच्छी लगी! मौर्य जी !,आपने आधुनिकीकरन और पशिचमीकरन को अलग- अलग किया है, इनके अर्थ,जहां तक मै समझा हूँ,क्रमशः नई-नई तकनीकी और रहन-सहन की शैली से है!मेरे विचार से दोनों किसी हद तक एक दूसरे से अलग नहीं किये जा सकते? स्व. राजीव जी ने २१ वीं सदी में जाने को प्रेरित किया और रास्ता दिखाया! क्योंकि इसके बिना हम पिछड़ जायेंगे! यही सोच थी उनकी,और यदि हम विक्सित देशों की कतार में आना चाहते है तो इसका प्रयास बुरा नहीं होगा! मै मानता हूँ की हमें बिना पशिचिमीकरन ( रहन- सहन ) के आधुनीकरण को अपनाना चाहिये, पर ऐसा संभव हो ही नहीं सकता? ( आप मेरी कई पोस्ट ‘अमेरीका और भारत’ नामक शीर्षक की देख सकते हैं.) यदि हम आधुनिक होना चाहते हैं तो हमें उन देशों के रहन -सहन की शैली को न चाहते हुए भी अपनाना होगा! यह जरूरत भले ही न हो पर हमारी विवशता ही हो सकती है, कहा भी जाता है को “कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ता है!” अब आप कितना पाते और कितना खोते हैं यह आपको देखना होगा! खोकर या पा कर आप नफ़ा नुक्सान आंके कोई जबरदस्ती नहीं है !

    अलंकार मौर्य के द्वारा
    30/09/2012

    पस्च्मिकरण से वैज्ञानिक और आर्थिक तरक्की का क्या सम्बन्ध है, यह बात समझ से परे है. अवैध शारीरिक संबंद, चारित्रिक और नैतिक पतन से देश की तार्राकी का क्या सम्बन्ध होई सकता है?भा?रत में जब वैदिक क़ानून चलते थे, तब भी भारत विश्वगुरु था.. हमारे विज्ञानं aur arthshastraka koi saani nahi tha. Saudi arabia, jo ki duniya k sabse ameer desho me se ek hai, me aaj bhi islami moolyo ka sarvochh sthaan hai.. Ladko aur ladkiyo ki shiksha alag alag hoti hai aur awaidh sambandho ki kathor saza hai.

drbhupendra के द्वारा
29/09/2012

पश्चिम का कूड़ा करकट भी जब अपना लेंगे तो यही होगा..


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