भारत - प्रथम विश्व चिंतन

भारत के कुछ अत्यंत एहेम मुद्दे, जिसे अत्यंत ही 'इग्नोरेंस' के साथ भुला दिया गया अथवा बात ही नहीं की गयी.... हम india और हिंदुत्व के बारे सोच सोचकर अपना खून जलने वाले बेवकूफों में शामिल हैं..

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अलंकार मौर्य


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आधुनिकीकरण बनाम पश्चिमीकरण

Posted On: 29 Sep, 2012  
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Hello world!

Posted On: 29 Mar, 2012  
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भारतीय शिक्षा पद्धति चिंताजनक

Posted On: 29 Mar, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आपकी सोच सही है इसलिए यह पोस्ट अच्छी लगी! मौर्य जी !,आपने आधुनिकीकरन और पशिचमीकरन को अलग- अलग किया है, इनके अर्थ,जहां तक मै समझा हूँ,क्रमशः नई-नई तकनीकी और रहन-सहन की शैली से है!मेरे विचार से दोनों किसी हद तक एक दूसरे से अलग नहीं किये जा सकते? स्व. राजीव जी ने २१ वीं सदी में जाने को प्रेरित किया और रास्ता दिखाया! क्योंकि इसके बिना हम पिछड़ जायेंगे! यही सोच थी उनकी,और यदि हम विक्सित देशों की कतार में आना चाहते है तो इसका प्रयास बुरा नहीं होगा! मै मानता हूँ की हमें बिना पशिचिमीकरन ( रहन- सहन ) के आधुनीकरण को अपनाना चाहिये, पर ऐसा संभव हो ही नहीं सकता? ( आप मेरी कई पोस्ट 'अमेरीका और भारत' नामक शीर्षक की देख सकते हैं.) यदि हम आधुनिक होना चाहते हैं तो हमें उन देशों के रहन -सहन की शैली को न चाहते हुए भी अपनाना होगा! यह जरूरत भले ही न हो पर हमारी विवशता ही हो सकती है, कहा भी जाता है को "कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ता है!" अब आप कितना पाते और कितना खोते हैं यह आपको देखना होगा! खोकर या पा कर आप नफ़ा नुक्सान आंके कोई जबरदस्ती नहीं है !

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani




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